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हिमाचल सदन में पुलिस कार्रवाई पर सुक्खू का तीखा प्रहार, बिना वारंट छापेमारी लोकतंत्र के खिलाफ: मुख्यमंत्री

हिमाचल सदन में पुलिस कार्रवाई पर मुख्यमंत्री का कड़ा विरोध
बिना वारंट छापेमारी को बताया लोकतंत्र के खिलाफ
यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर केंद्र और विपक्ष पर साधा निशाना


हिमाचल प्रदेश की राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दिल्ली स्थित हिमाचल सदन में हुई पुलिस कार्रवाई और यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने इस पूरी घटना को न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बताया, बल्कि इसे लोकतंत्र की मर्यादाओं के खिलाफ करार दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना और बिना वारंट के इस प्रकार की छापेमारी करना लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन है और यह तरीका किसी भी संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हिमाचल भवन और हिमाचल सदन राज्य की जनता की संपत्ति हैं और वहां ठहरने की प्रक्रिया पूरी तरह व्यवस्थित और पारदर्शी है। उन्होंने कहा कि यहां कमरों की बुकिंग अक्सर सीएम कार्यालय या अन्य अधिकृत माध्यमों से की जाती है। ऐसे में यह आरोप कि वहां केवल खास लोगों को ही ठहरने की अनुमति दी जाती है, पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं बल्कि आम जनता और पत्रकारों के लिए भी कमरों की व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं।

सुक्खू ने उदयभान और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश उचित नहीं है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और विपक्षी दलों पर हिमाचल प्रदेश के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार पूरी मजबूती से खड़ी है।

उन्होंने यह भी दोहराया कि 15वें और 16वें वित्त आयोग के समक्ष हिमाचल की मांगों को मजबूती से रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के आर्थिक हितों और विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उचित वित्तीय सहयोग की मांग लगातार उठाई जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी और राज्य के सम्मान व स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।